यूपी में गेहूं खरीद का महा-अभियान: ₹2585 एमएसपी के साथ 50 लाख टन खरीद का लक्ष्य
Mega Wheat Procurement Drive in UP
लखनऊ। Mega Wheat Procurement Drive in UP, रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए गेहूं की सरकारी खरीद इस बार 30 मार्च से 15 जून तक की जाएगी। खरीद के लिए गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में 160 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है।
पिछले रबी विपणन वर्ष में 2425 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी था, जबकि इस बार 2585 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीद की जाएगी। सरकार ने इस बार 50 लाख टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य तय किया है। सोमवार को कैबिनेट की बैठक में गेहूं क्रय नीति को स्वीकृति दे दी गई
कैबिनेट की बैठक के बाद कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि गेहूं खरीद के लिए खाद्य एवं रसद विभाग की विपणन शाखा सहित आठ क्रय एजेंसियों द्वारा 6500 क्रय केंद्र स्थापित किए जाएंगे। सुबह नौ बजे से शाम छह तक क्रय केंद्रों का संचालन होगा।
इन केंद्रों पर किसानों की सुविधा के लिए छाया, पानी व बैठने आदि की व्यवस्था की जा रही है। क्रय केंद्रों पर आने वाले गेहूं की उतराई, छनाई व सफाई के लिए किसानों को 20 रुपये प्रति क्विंटल अलग से दिया जाएगा।
कृषि मंत्री ने बताया कि खाद्य एवं रसद विभाग ने इस बार खरीद का लक्ष्य 30 लाख टन रखने का प्रस्ताव दिया था, परंतु मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लक्ष्य को बढ़ाकर 50 लाख टन करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने 48 घंटे के भीतर डीबीटी के माध्यम से किसानों को भुगतान के भी निर्देश दिए हैं।
बिचौलियों का हस्तक्षेप न रहे, इसलिए सारा सिस्टम आनलाइन कर दिया गया है। खाद्य व रसद विभाग के मुताबिक गेहूं विक्रय के लिए सोमवार तक 1,95,628 किसानों ने पंजीकरण करा लिया है। वहीं 2829 क्रय केंद्रों की स्थापना की जा चुकी है।
मंत्री ने बताया कि इस बार कृषि उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और कृषि उत्पादक कंपनियों (एफपीसी) को भी क्रय एजेंसियों के माध्यम से खरीद की अनुमति दी गई है, परंतु इसके लिए उनका पंजीकरण एक वर्ष पुराना होना चाहिए और खाते में 20 लाख रुपये की धनराशि होनी चाहिए।
धान आपूर्ति को दूर होगी बोरों की कमी
खरीफ विपणन वर्ष के तहत हुई धान खरीद की प्रक्रिया में सामने आई बोरों की कमी दूर होने जा रही है। कैबिनेट ने सोमवार को खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के तहत भारत सरकार से प्राप्त आवंटन के हिसाब 87000 गांठ जूट बोरा क्रय करने के लिए कम पड़ रही धनराशि की वित्तीय स्वीकृति दे दी है।
बाेरों के दाम बढ़ने के कारण 71,787 बोरों की ही आपूर्ति हो पाई थी और शेष खरीद के लिए 100 करोड़ रुपये से अधिक की आवश्यकता जताई गई थी।
सूत्रों के मुताबिक बोरों की कमी से कुछ जगह धान और कस्टम मिल्ड राइस की आपूर्ति में बाधा आई थी। अब बोरों की उपलब्धता के बाद इसका समाधान हो जाएगा।